मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस पर जागरूकता अभियान : एक साथ मेनिनजाइटिस के खिलाफ

Awareness campaign on meningococcal meningitis against meningitis simultaneously

मुझे वो दिन याद है, जब मेरे एक फेमिली फ्रेंड अपनी सब-सहारा अफ्रीकी देश की यात्रा पूरी करने वापस आए थे। यहां आते ही उनकी 13 साल की बेटी को तेज बुखार हो गया और त्वचा पर लाल रंग के चकत्ते हो गए। वो इसे वायरल बुखार समझकर तुरंत अपने डॉक्टर के पास चेकअप के लिए ले गए। धीरे-धीरे उसे नींद आने लगी और पूरे शरीर में तेज दर्द होने लगा। थोड़ी ही देर में वह बड़बड़ाने लगी और उसकी हालत लगातार खराब होती चली गई। उसकी हालत को देखते हुए, उसे तुरंत आईसीयू में भर्ती कराया गया, जहां उसे एंटीबायोटिक की भारी डोज दी गई। साथ ही उसके स्पाइनल फ्लूइड को जांच के लिए भेजा गया।

उस घटना को याद करके आज भी मेरे रौंगते खड़े हो जाते हैं। उस 13 साल की बच्ची के माता-पिता का रो-रोकर बुरा हाल था। उन्हें यह तक पता नहीं था कि आखिर उनकी बेटी को हुआ क्या है। सच में वो गंभीर मेडिकल इमरजेंसी थी, जिसमें उस मासूम-सी लड़की को 105 डिग्री बुखार और त्वचा पर जगह-जगह चकत्ते थे। आखिरकार कुछ समय बाद डॉक्टरों ने बताया कि उनकी बेटी मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस से पीड़ित है। साथ ही डॉक्टरों ने जो बताया, उसने हम सभी को अंदर से हिलाकर रख दिया। डॉक्टर का कहना था कि उनकी बेटी एक महीने में ठीक हो जाएगी, लेकिन उसे हमेशा न्यूरोलॉजिकल दोष और सुनने में कुछ परेशानी रहेगी।

मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस: खतरे में कौन है?

आमतौर पर मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस के निशाने पर सबसे ज्यादा बच्चे होते हैं, जिनकी उम्र लगभग पांच साल से कम हो, उसके बाद किशोर (13-19 साल) और फिर व्यस्क आते हैं। अगर इस संक्रमण का सही समय पर इलाज नहीं किया जाए, तो इस बीमारी से मृत्यु दर 50% तक होती है (1)। इस रोग के बढ़ने की आशंका तब और बढ़ जाती है जब :

  • आप इम्यून सिस्टम कमजोर हो।
  • अगर आप अफ्रीकी देशों की यात्रा कर रहे हों।
  • आप किसी भीड़ वाली जगह पर जा रहे हों।

मेनिनजाइटिस केवल मनुष्यों को प्रभावित करता है। यह सांस के जरिए, खांसी के जरिए और लंबे समय तक एक संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में रहने से फैलता है। इसीलिए, हमेशा स्वच्छता का ध्यान रखें और अपने बच्चों को भी बेहतरीन स्वच्छता के बारे में सिखाएं।

मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस टीकाकरण: इस जानलेवा बीमारी का सबसे अच्छा हल

मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस एक गंभीर बीमारी है, जो मस्तिष्क से संबंधित कई गंभीर दोषों का कारण बन सकती है। इसकी रोकथाम के लिए टीकाकरण ही सबसे अच्छा विकल्प है। कई अलग-अलग प्रकार के बैक्टीरिया हैं, जो मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस होने का कारण बन सकते हैं। राहत की बात तो यह है कि जिन पांच प्रकार के आम बैक्टीरिया के कारण सबसे ज्यादा मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस होने का खतरा रहता है, उनसे बचने के लिए वैक्सीन उपलब्ध है, जिसे मेनिंगोकोकल कंजुगेट वैक्सीन (MCV) कहा जाता है। यह वैक्सीन पूरी तरह से प्रमाणित है और इसे 9 महीने से 55 वर्ष की उम्र के बीच किसी को भी लगाया जा सकता है (2)। जब बच्चे किशोरावस्था में प्रवेश करते हैं, तो उन्हें संक्रमण होने का खतरा ज्यादा होता है। इसलिए, 11-12 साल की उम्र में MCV का टीकाकरण करवा देना चाहिए और जब वो 16 वर्ष के हो जाएं, तो उन्हें बूस्टर डोज लगवाना चाहिए। इसके अलावा, जो व्यस्क लोग अक्सर यात्रा करते हैं, उन्हें संक्रमित होने का खतरा हो सकता है। इसलिए, ऐसे लोग अपने डॉक्टर की सलाह पर इस टीके को लगवा सकते हैं (3)।

आमतौर पर यह टीका सुरक्षित होता है, लेकिन कभी-कभी कुछ लोगों को इससे थोड़ी परेशानी भी हो सकती है। जैसे हल्का बुखार और रेडनेस (त्वचा पर लालिमा), जो 1 से 2 दिन में ठीक हो जाती है।

भारत में मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस से बचने के लिए लगने वाला टीका अभी तक अनिवार्य टीकाकरण की सूची में शामिल नहीं है। फिर भी कई जोखिम कारकों और 5 साल से कम उम्र के बच्चों के इस संक्रमण की चपेट में आने की आशंका के मद्देनजर मेनिंगोकोकल कंजुगेट वैक्सीन को जरूर दिया जाना चाहिए। आपके लिए यह उपयुक्त समय है कि आप अपने बाल रोग विशेषज्ञ से मेनिंगोकोकल मेनिनजाइटिस के बारे में बात करें और अपने बच्चों को इससे बचाए रखने के लिए टीका लगवाएं।

आप अपने बच्चे को खुशहाल व रोगमुक्त जीवन का उपहार दें!

वैधानिक सूचना : इस ब्लॉग में बताए गए विचार पूरी तरह से ब्लॉगर के स्वतंत्र और निष्पक्ष हैं। इन्हें मेनिनजाइटिस के प्रति लोगों को जागरूक करने के उद्देश्य से प्रस्तुत किया गया है। इस बीमारी के प्रति जागरूकता लाने की पहल सनोफी पेस्ट्यूर इंडिया ने की है, लेकिन लेख में शामिल किए गए विचारों से उनका कोई संबंध नहीं है। वहीं, समय के साथ रिसर्च और शोध के आधार पर इस बीमारी से संबंधित जानकारी के विषय में बदलाव भी संभव है। इसलिए, लेख में भिन्नता मिलने पर ब्लॉग व लेखक इसके लिए जिम्मेदार नहीं है। ऐसे में इस लेख को महज विषय और जानकारी के आधार पर लें। साथ ही कोई भी कदम उठाने से पूर्व एक बार अपने डॉक्टर से परामर्श जरूर कर लें। हमारा उद्देश्य केवल इस बीमारी के प्रति आपको जागरूक करना है।

संदर्भ (References):

1. Meningococcal meningitis By W.H.O.
2. Meningococcal meningitis By SANOFI
3. Meningococcal Vaccination By Centers for Disease Control and Prevention

Author: Atulya

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