प्रेगनेंसी में क्या काम करना चाहिए और क्या नहीं ?। Pregnancy Me Kya Kam Karna Chahiye Aur Kya Nahi

Pregnancy Me Kya Kam Karna Chahiye Aur Kya Nahi
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गर्भावस्था किसी भी महिला के लिए सबसे अनमोल पल होता है। इस दौरान महिलाओं को अपने परिवार और रिश्तेदारों से अलग-अलग सलाह भी मिलती हैं। जैसे ये मत खाओ, वो मत खाओ, यहां मत जाओ, ऐसे में मत उठो और पता नहीं क्या-क्या। वैसे राय देना गलत नहीं है, लेकिन कई बार अलग-अलग राय के चक्करों में गर्भवती महिला उलझन में आ जाती हैं। खासतौर पर वो महिलाएं, जो पहली बार मां बनने जा रही हैं।

ऐसे में मॉमजंक्शन के इस लेख में हम आपको वो सभी जरूरी जानकारी दे रहे हैं, जिनके बारे में एक गर्भवती को पता होना चाहिए और उसका सही से पालन करना चाहिए। इस लेख में जानिए कि गर्भावस्था की तीनों तिमाहियों में क्या-क्या करना चाहिए और क्या-क्या नहीं।

गर्भावस्था में क्या करना चाहिए | Pregnancy Me Kya Karna Chahiye

अगर आप लोगों की राय सुन-सुनकर थक चुकी हैं और इस उलझन में हैं कि गर्भावस्था की तीनों तिमाहियों में क्या-क्या कर सकती हैं, तो लेख के इस भाग को पढ़ने के बाद आपकी उलझन कुछ हद तक कम हो जाएगी। यहां हम आपको हर तिमाही के अनुसार प्रेगनेंसी में क्या करना चाहिए, इस बात की जानकारी देने जा रहे हैं।

पहली तिमाही में क्या करना चाहिए

1. प्रेगनेंसी कन्फर्म करें – अगर आपने घर में प्रेगनेंसी किट की मदद से टेस्ट किया है, तो बेहतर होगा कि आप किसी अनुभवी गाइनोक्लोजिस्ट से अपनी प्रेगनेंसी कन्फर्म कराएं।

2. डॉक्टर चेकअप – एक बार जब आपकी गर्भावस्था की पुष्टि हो जाए, तो आप गाइनोक्लोजिस्ट से चेकअप के बारे में जानकारी लें कि आपको कब-कब चेकअप के लिए आना है।

3. सवाल के लिए रहें तैयार – आपकी गर्भावस्था की पुष्टि के बाद डॉक्टर आप से कई स्वास्थ्य संबंधी सवाल पूछ सकते हैं, जो इस प्रकार हैं :

    • क्या आपको पहले कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या तो नहीं रही है?
    • क्या आप कोई खास तरह की दवा ले रही हैं?
    • क्या आप धूम्रपान या अल्कोहल का सेवन करती हैं?
    • आपको या परिवार में किसी को कोई आनुवंशिक विकार तो नहीं?

इन सभी सवालों का जवाब आप डॉक्टर को सही-सही बताएं (1)

4. डॉक्टर से सलाह करें – जब आप पहली तिमाही में डॉक्टर के पास चेकअप के लिए जाएंगी, तो जाहिर सी बात है, आपके मन में कई सारे सवाल और उलझन होंगी। इसलिए, बिना किसी झिझक के आप सारी बातें डॉक्टर से पूछें। नीचे हम कुछ सामान्य, लेकिन ध्यान देने वाली बातों के बारे में जानकारी दे रहे हैं, जिसके बारे में आप डॉक्टर से पूछ सकती हैं (1)

    • डॉक्टर से डाइट चार्ट के बारे में जानकारी लें।
    • जीवनशैली में क्या-क्या बदलाव करने हैं।
    • व्यायाम करना है या नहीं।
    • किस तरह के व्यायाम या योग करने हैं।
    • गर्भावस्था में होने वाले सामान्य समस्याएं जैसे – सीने में जलन, एसिडिटी, वेरीकोज वेन व थकावट आदि से कैसे आराम पाया जाए।
    • मॉर्निंग सिकनेस से कैसे निपटा जाए।
    • अगर प्रारंभिक गर्भावस्था में ब्लीडिंग हो तो क्या करें।
    • गर्भावस्था के दौरान कब डॉक्टर के पास आना जरूरी हो सकता है।

5. वैक्सीन लगवाएं – गर्भावस्था से पहले और गर्भावस्था के दौरान महिला को वैक्सीन लगवाने की जरूरत होती है। वैक्सीन जैसे – फ्लू शॉट और व्हूपिंग कफ के इंजेक्शन (2)। इन्हें कब लगवाना है, यह जानकारी डॉक्टर आपको रूटीन चेकअप के दौरान बताएंगे।

6. गर्भावस्था के बारे में बताने का वक्त तय करें – कई महिलाएं गर्भावस्था के बारे में जानने के बाद ही सभी को बताने लगती हैं। वहीं, कुछ महिलाएं गर्भावस्था के बारे में जानने के बाद भी कुछ वक्त तक इसे छुपाकर रखती हैं। गर्भावस्था के बारे में अन्य लोगों को बताना है या नहीं, यह पूरी तरह से आपका व आपके पति का निजी फैसला है। इसलिए, आपस में राय करके इसकी घोषणा करें।

7. बजट बनाएं – गर्भावस्था का समय पति और पत्नी दोनों के लिए खुशियों के साथ-साथ कई जिम्मेदारियां भी लेकर आता है। इसलिए, उन जिम्मेदारियों के लिए तैयार रहें। अपने बजट पर ध्यान दें और भविष्य में शिशु की जरूरतों के अनुसार अपना बजट तैयार करें। फिजूल खर्च से बचें और पैसे जमा करने के बारे में सोचें।

8. फोटो लें – हर हफ्ते आईने के सामने खड़े होकर खुद की फोटो खींचे, ताकि आप अपने शारीरिक बदलावों को देख सकें और तस्वीर खींचकर हमेशा के लिए इन पलों को कैद कर सकें। जब आपके गर्भावस्था के चरण खत्म हो जाएं, तो आप तस्वीरों को देखकर उन पलों को याद कर सकती हैं।

9. पति से बात करें – गर्भावस्था के दौरान अपने पति से अपने अनुभव साझा करें। भविष्य में होने वाले बदलाव और जिम्मेदारियों को कैसे निभाना है, उस बारे में बात करें। अगर आपके पति को घबराहट या इन सब चीजों को लेकर कोई तनाव है, तो उस बारे में भी बात करें। याद रखें कि बात करने से ही बात बनती है।

10. स्वास्थ्य बीमा – अगर आपका स्वास्थ्य बीमा है, तो पता करें कि उसके प्लान में गर्भावस्था के दौरान क्या-क्या चीजें कवर हो सकती हैं।

11. नींद की आदतों में बदलाव – गर्भावस्था की पहली तिमाही में थकान व सुस्ती हो सकती है। ऐसे में अपनी नींद की आदतों में बदलाव करें। रात को जल्दी सोने जाएं और हो सके तो दिन में भी आप थोड़ी-थोड़ी देर की झपकी ले सकती हैं (3)

दूसरी तिमाही में क्या करना चाहिए

1. डॉक्टर चेकअप – अब जैसे कि आप दूसरी तिमाही में कदम रख चुकी हैं, तो डॉक्टरी चेकअप में कई चीजें जुड़ गई हैं, जैसे – आपका वजन, ब्लड टेस्ट, ब्लड प्रेशर और पेट के आकार की माप (ताकि पता चले कि बच्चे का विकास सही तरीके से हो रहा है या नहीं)। कभी-कभी डॉक्टर यूरिन की जांच के साथ कई अन्य टेस्ट के लिए भी बोल सकते हैं (4)। इसके अलावा, आपको कौन से जरूरी वैक्सीन की आवश्यकता है, इसकी जानकारी भी आपको डॉक्टर देंगे।

2. यात्रा करना – अगर आपकी गर्भावस्था सामान्य है और कोई जटिलता नहीं है, तो आप डॉक्टर की सलाह लेकर दूसरी तिमाही में यात्रा कर सकती हैं (5)। ध्यान रहे कि यात्रा के दौरान आप अपनी जरूरी दवाइयां और जरूरत की चीजें साथ रखें। अगर आप गाड़ी से कहीं भी यात्रा करती हैं, तो सीट बेल्ट को सही तरीके से लगाएं। ध्यान रहे कि सीट बेल्ट से आपका पेट न दबे। किसी भी यात्रा में आरामदायक कपड़े और जूते पहनें।

3. मॉइस्चराइजर लगाएं – जैसे-जैसे आपकी प्रेगनेंसी बढ़ेगी और आपके पेट का आकर बढ़ेगा, वैसे-वैसे स्ट्रेच मार्क्स दिखने शुरू होंगे। साथ ही पेट और कमर के आसपास के हिस्सों में खुजली की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में डॉक्टर से बात करके डॉक्टर की सलाह के अनुसार आप मॉइस्चराइजर या स्ट्रेच मार्क्स क्रीम का उपयोग कर सकती हैं।

4. मैटरनिटी लीव प्लान करें – अगर आप जॉब करती हैं, तो अपने मैटरनिटी लीव को प्लान करें। आप अपने एचआर डिपार्टमेंट से बात करें और अपनी छुट्टियों के बारे में सारी जानकारी लें।

5. नाम का चुनाव करने की शुरूआत करें – अब वो वक्त आ चुका है, जब आप अपने होने वाले बच्चे के नाम के बारे में सोचना शुरू करें। नाम ही किसी बच्चे को उसकी पहचान दिलाता है, तो अपने मन में लड़की और लड़के दोनों के लिए नाम का चुनाव करना शुरू करें।

6. शिशु के देखभाल के तरीके – अगर आप पहली बार गर्भवती हुई हैं, तो आने वाले शिशु की देखभाल के तरीके जानना शुरू करें। बेबी केयर किताबें पढ़ें, घर में बड़ों से बात करें और उनके अनुभवों को जानें। बेबी की जरूरतों के सामान की सूची तैयार करें।

7. अपने पहले बच्चे को तैयार करें – अगर यह आपकी दूसरी गर्भावस्था है और आपकी पहले से एक संतान है, तो आप अपने पहले बच्चे को आने वाले नन्हे मेहमान के बारे में बताएं। कई बार देखा गया है कि दूसरे बच्चे से पहले बच्चे को ईर्ष्या की भावना हो जाती है, जो चिंता का विषय हो सकता है। ऐसे में यह माता-पिता का कर्तव्य है कि वह पहले और दूसरे बच्चे के बीच संतुलन बनाकर रखें। उन्हें एहसास दिलाएं कि उनके लिए दोनों बच्चे बराबर हैं।

अगर आपकी पहली संतान छोटी है यानी दो से तीन साल की है, तो उन्हें ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा या उन्हें चीजों में ज्यादा अंतर समझ नहीं आएंगे। ऐसे में आप नीचे बताई गई बातों को ध्यान में रखते हुए अपनी पहली संतान को आने वाले बच्चे के बारे में थोड़ा-बहुत तैयार कर सकते हैं (6)

    • अपने बच्चे के सामने छोटे बच्चों की तस्वीर वाली किताब दिखाएं और उन्हें आने वाले बच्चे के बारे में जानकारी दें। उन्हें भाई-बहन के बारे में बताएं।
    • अपने बच्चे को थोड़ी देर किसी परिजन के साथ रहने के लिए तैयार करें, ताकि जब आप हॉस्पिटल जाएं, तो उन्हें परेशानी न हो।
    • हॉस्पिटल जाते वक्त उन्हें बताएं कि आप उनके भाई या बहन को लेकर आएंगी।
    • दूसरे बच्चे के आने के बाद आप अपने पहले बच्चे के लिए कोई सरप्राइज तैयार करें या उनकी कोई पसंदीदा चीज गिफ्ट में दें।

8. व्यायाम – अगर आपकी गर्भावस्था सामान्य है और आपको किसी प्रकार की समस्या नहीं है, तो आप हल्के-फुल्के व्यायाम कर सकती हैं (7)। वॉक, स्विमिंग या प्रेगनेंसी एक्सरसाइज क्लास में जाकर गर्भावस्था के दौरान करने वाले व्यायामों के बारे में जानकर उन्हें कर सकती हैं (8)। हालांकि, गर्भावस्था के दौरान किसी भी तरह के व्यायाम या योग करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें और साथ ही विशेषज्ञ की देखरेख में ही करें।

9. गोदभराई के बारे में प्लान करें – गोदभराई लगभग हर समुदाय में की जाती है, बस इस रस्म को मनाने का महीना अलग-अलग हो सकता है। हालांकि, गर्भवती महिला और उसके होने वाले बच्चे को आशीर्वाद देने की यह रस्म आने वाले बच्चे की खुशी के लिए होती है। इसलिए, आप भी इस रस्म के लिए पहले से ही प्लान बनाकर रखें कि आपको गोदभराई की रस्म कब करनी है। मेहमानों की सूची, गोदभराई की थीम और आपको क्या पहनना है, इन सबके बारे में तैयारी करें।

10. कपड़ों का चुनाव – जैसे-जैसे आपकी गर्भावस्था बढ़ेगी आपके वजन और आपके शरीर के आकार में भी फर्क आना शुरू होगा। इसलिए, अब वक्त आ चुका है कि आप अपने मैटरनिटी कपड़ों की शॉपिंग शुरू करें। ढीले और आरामदायक कपड़ों का चुनाव करें और साथ ही आरामदायक फुटवियर भी चुनें, जिसमें आपको चलने में आसानी हो और आप फिसले नहीं।

11. बेबी मूवमेंट पर ध्यान दें – गर्भावस्था के 15वें से 18वें हफ्ते के बीच यानी चौथे महीने से शिशु मूवमेंट यानी हरकत करना शुरू कर देते हैं (9)। इसका आभास गर्भवती महिला को होने लगता है। इसलिए, जैसे-जैसे महीने बढ़ने लगे, वैसे-वैसे शिशु की हरकतों का ध्यान रखें और जब भी डॉक्टर के पास जाएं, तो अपने अनुभव उनके साथ साझा करें। अगर आपको लगे कि शिशु सुस्त है या जरूरत से ज्यादा हरकत कर रहा है, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

12. हॉस्पिटल का चुनाव करें – हॉस्पिटल के बारे में जानकारी लें या अगर आपके मन में कोई हॉस्पिटल है, जहां की आपको जानकारी है, तो उसे अपने लिस्ट में रखें। प्रसव के लिए पहले ही हॉस्पिटल का चुनाव कर लें।

13. कैसे सोएं – दूसरी तिमाही आते-आते शरीर में कई सारे बदलाव होने लगते हैं। कुछ महिलाओं को सोते वक्त नाक बंद और पैरों में ऐंठन हो सकती है या बुरे सपने भी आ सकते हैं। ऐसे में सोने की मुद्रा में बदलाव करें, एक तरफ होकर और सिर को हल्का उठाकर या सिर के नीचे नर्म तकिया लेकर सोएं। सोते वक्त प्रेगनेंसी पिलो का उपयोग शुरू करें। अगर बुरे सपने आ रहे हैं या नींद नहीं आ रही है, तो इस बारे में अपने पार्टनर से बात करें (10)। कोशिश करें कि रात को सोने का वक्त निर्धारित रहे और उसमें कोई बदलाव न होने दें।

14. शिशु से बात करें – गर्भावस्था के 20वें हफ्ते में भ्रूण के कान विकसित हो जाते हैं और 24वां हफ्ता आते-आते शिशु आवाजों पर प्रतिक्रिया देने लगते हैं (11)। ऐसे में कई लोगों का मानना है कि शिशु से बातें करना शुरू करें, ताकि आपके और आपके शिशु में एक भावनात्मक तार जुड़े। मां और शिशु के बीच बातचीत दोनों के लिए फायदेमंद है।

तीसरी तिमाही में क्या करना चाहिए

1. डॉक्टर चेकअप – तीसरी तिमाही में गर्भवती को ज्यादा सतर्क रहने के साथ-साथ खुद का पहले से ज्यादा ध्यान रखना जरूरी होता है। अगर अपने में कोई भी नया बदलाव या बच्चे की हरकत में कुछ उतार-चढ़ाव महसूस हो, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। डॉक्टर से चेकअप के दौरान मन में जो भी संदेह हो, उसे पूछ लें और डॉक्टर जो भी टेस्ट दे उसे कराएं। साथ ही प्रसव से जुड़ा कोई भी सवाल हो उसे जरूर पूछें।

2. मानसिक तौर पर खुद को तैयार करें – गर्भावस्था की तीसरी तिमाही में जाहिर सी बात है मन में कई सवाल, बेचैनी, डर और खुशी हर तरह के भाव आएंगे। तो किसी विशेषज्ञ या परिवार में किसी बड़े से बात करें और प्रसव के लिए और बच्चे के जन्म के बाद की जिम्मेदारियों के लिए मानसिक तौर पर खुद को तैयार करें। किसी प्रकार की चिंता या डर से दूर रहने की कोशिश करें और ध्यान लगाएं, ताकि मन शांत हो।

3. मैटरनिटी बैग तैयार करें – तीसरी तिमाही में आने के बाद अपने मैटरनिटी बैग को तैयार करें। सबसे पहले सूची तैयार करें कि मैटरनिटी बैग में क्या-क्या जरूरत की चीजें रखनी है। यह सूची महिला खुद भी बना सकती है या इसे बनाने के लिए अपने पति या किसी परिजन की मदद भी ले सकती हैं। सबसे पहले मैटरनिटी बैग में गर्भवती महिला की जरूरत की चीजों की सूची बनाएं, जिनमें – कपड़े, चप्पल, जरूरी पेपर या डॉक्यूमेंट, टूथपेस्ट, टूथब्रश, साबुन, पैड्स और जो भी जरूरत की अन्य चीजें हैं सब रखें।

प्रसव के पहले और बाद में एक व्यक्ति को महिला के साथ रुकना होता है, तो इसके लिए उस व्यक्ति के जरूरत के सामान की सूची तैयार कर उन चीजों को रखें।

उसके बाद एक सूची होने वाले शिशु के लिए तैयार करें कि आपके नन्हे मेहमान को किन-किन चीजों की जरूरत है। ऐसे करके अपना मैटरनिटी बैग तैयार करें।

4. डिलीवरी के बाद के बदलाव – प्रसव के बाद शरीर और जीवन में होने वाले बदलावों के लिए खुद को तैयार रखें। बड़ों से और विशेषज्ञों से बात करें और उनका अनुभव जानें और खुद को तैयार करें।

5. पति से बात करें – पति से बात करें और आपस में सलाह करें कि बच्चे की जिम्मेदारियों को कैसे आपस में बांटना है। बच्चे के आने के बाद जीवनशैली में होने वाले बदलावों पर ध्यान दें और दोनों उसके लिए तैयार रहे।

6. सोने पर ध्यान दें – तीसरी तिमाही में शरीर में कई सारे बदलाव हो जाते हैं और हो सकता है कि सोने में और ज्यादा मुश्किलें होने लगे। सीधा पीठ के और पेट के बल सोने से बचें। तीसरी तिमाही में गर्भवती को बार-बार पेशाब जाने की जरूरत हो, तो ऐसे में डॉक्टर या विशेषज्ञ की राय के अनुसार आप पेल्विक फ्लोर एक्सरसाइज भी कर सकती हैं। सोते वक्त प्रेगनेंसी पिलो का उपयोग भी कर सकती हैं (10)

7. नंबर साथ रखें – तीसरी तिमाही में जब आपके प्रसव के दिन नजदीक हों, तो अपने करीबी मित्रों या रिश्तेदारों का फोन नंबर साथ रखें, ताकि आपको जब भी उनकी जरूरत हो, तो उन्हें तुरंत फोन कर मदद के लिए बुला सकें।

8. अकेले बाहर न जाएं – अगर आप कहीं बाहर जा रही हैं, तो अपने किसी सगे-संबंधी या मित्र को भी अपने साथ ले जाएं, अकेले न जाएं। गर्भावस्था के तीसरी तिमाही में ज्यादा सावधान रहें और ज्यादा से ज्यादा खुद का ध्यान रखें और कोई भी जोखिम या लापरवाही न करें।

लेख के आगे के भाग में जानिए गर्भावस्था की तीनों तिमाही में करने वाली सामान्य चीजें।

तीनों तिमाही में करने वाली सामान्य चीजें

कुछ चीजें हैं, जो गर्भावस्था की पहली, दूसरी और तीसरी तिमाही में सामान्य होती हैं, जिसके बारे में हम आपको नीचे जानकारी दे रहे हैं।

1. स्वस्थ खाना खाएं – अपने खाद्य पदार्थ में पोषक तत्व युक्त भोजन को शामिल करें। फोलिक एसिड और आयरन युक्त भोजन को शामिल करें। गर्भावस्था के दौरान फोलिक एसिड और आयरन काफी जरूरी होते हैं। फोलिक एसिड के सेवन से होने वाले शिशु में न्यूरल ट्यूब डिफेक्ट (मस्तिष्क और रीढ़ को प्रभावित करने वाला जन्म दोष) का जोखिम कम हो सकता है (12)। वहीं, आयरन की कमी से गर्भवती को एनीमिया यानि खून की कमी की हो सकती है, ऐसे में आयरन युक्त खाद्य पदार्थ शरीर में आयरन की पूर्ति का काम करेंगे (13)

इसके साथ ही आहार में प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, कैल्शियम, फाइबर, आयोडीन और विटामिन डी युक्त खाद्य पदार्थों को शामिल करें। खाने में हरी-सब्जियां, अंडे, सेब, संतरा व पीनट बटर जैसे खाद्य पदार्थों को शामिल करें (14) (15) (16)

अगर आहार की बात करें, तो तीनों तिमाही में स्वस्थ और पौष्टिक आहार लेने की राय दी जाती है। डॉक्टर महिला की स्थिति और आदतों के अनुसार उन्हें किस तरह के खाद्य पदार्थों की जरूरत है, उस बारे में जानकारी देते हैं और कई बार डॉक्टर गर्भवती को उनके अनुसार डाइट चार्ट भी देते हैं।

सावधानी : ध्यान रहे अंडा, मछली और चिकन अच्छे से पका हुआ हो। कोई भी डिब्बाबंद खाद्य पदार्थ लेते वक्त उसके बनने या पैक करने की तिथि और उसे कब तक उपयोग कर सकते हैं, उसकी तिथि जरूर देखें (17)

2. वजन संतुलित रखें – गर्भावस्था के दौरान वजन को संतुलित बनाए रखें। वजन बढ़ाना है या घटाना है, यह गर्भवती के स्वास्थ्य पर निर्भर करता है। अगर महिला का वजन जरूरत से ज्यादा है, तो उसे वजन घटाने का निर्देश दिया जाता है और अगर महिला का वजन कम है, तो उसे शरीर की जरूरत के अनुसार वजन बढ़ाने का निर्देश दिया जाता है। वजन घटाना या बढ़ाना है, इसके लिए डॉक्टर से आपको सटीक जानकारी मिल जाएगी। ध्यान रहे कि तीनों तिमाही में गर्भवती के वजन का संतुलित रहना आवश्यक है (18)

3. पानी या तरल पदार्थ खूब पीएं – तीनों तिमाही में पानी या तरल पदार्थ का सेवन जरूरी है। यह न सिर्फ एमनियोटिक द्रव (गर्भाशय में मौजूद द्रव, जो भ्रूण की सुरक्षा करता है) के सपोर्ट के लिए जरूरी है (19), बल्कि गर्भावस्था के दौरान कब्ज की समस्या से राहत दिलाने के लिए भी मददगार साबित हो सकता है। आप हर रोज 8 से 10 गिलास पानी पिएं (20)

4. साफ-सुथरे माहौल में रहें – ध्यान रहे कि आपके घर में साफ-सफाई रहे। इसके लिए आप किसी की मदद भी ले सकती हैं, ताकि गर्भावस्था के दौरान और शिशु के जन्म के बाद मां और शिशु संक्रमण से सुरक्षित रहें।

5. डॉक्टर की परामर्श – तीनों तिमाही में डॉक्टर से रूटीन चेकअप कराना जरूरी है, ताकि आप अपनी गर्भावस्था में होने वाले बदलावों को जान सकें। साथ ही आपको यह तस्सली हो सके कि आप और गर्भ में पल रहा आपका शिशु सुरक्षित है। साथ ही अन्य जरूरतें और बदलावों के बारे में भी आपको जानकारी रहे।

6. गर्भावस्था में तस्वीर लें – तीनों तिमाही में हर हफ्ते अपनी तस्वीर खींचे। ऐसा करने से न सिर्फ आपको अपने में होने वाले बदलाव और भ्रूण का विकास नजर आएगा, बल्कि यह आपके लिए एक याद की तरह रह जाएंगे। जब आप मां बन चुकी होंगी, तो अपनी गर्भावस्था के तस्वीरों को देखकर उन दिनों को याद कर सकेंगी। ये तस्वीरें खूबसूरत यादों की तरह हमेशा के लिए आपके जीवन का हिस्सा बन जाएंगी।

7. गर्भावस्था के दौरान संभोग – कई कपल के मन में यह बात आती होगी कि गर्भावस्था के दौरान संभोग सुरक्षित है या नहीं? अगर गर्भावस्था सामान्य है और किसी प्रकार की जटिलता नहीं है, तो गर्भावस्था के दौरान संभोग करना सुरक्षित हो सकता है (21)। अगर आपको गर्भपात का खतरा, प्लेसेंटा प्रिविआ या अन्य कोई स्वास्थ्य समस्या है, तो गर्भावस्था के दौरान संभोग करना नुकसानदायक हो सकता है (22)। हालांकि, इस बारे में आप डॉक्टर से बात कर सकते हैं।

8. मुंह की सफाई रखें – गर्भावस्था के दौरान मसूड़ों में सूजन हो सकती है और मसूड़ों से खून आने की समस्या भी हो सकती है। ऐसे में सही तरीके से ब्रश करें और मुंह को साफ रखें, ताकि आपको ज्यादा परेशानी न हो (23)। गर्भावस्था के दौरान महिला को मसूड़ों से खून आने की समस्या भी हो सकती है, जिसे प्रेगनेंसी जिंजिवाइटिस (Gingivitis) कहते हैं। ऐसे में गर्भावस्था के दौरान सही तरीके से डेंटल चेकअप भी कराना जरूरी है (24)

प्रेगनेंसी में क्या काम करना चाहिए, यह जानने के बाद अब पता करते हैं कि प्रेगनेंसी में क्या नहीं करना चाहिए।

प्रेगनेंसी में क्या नहीं करना चाहिए | Pregnancy Me Kya Nahi Karna Chahiye

लेख के इस भाग में हम आपको प्रेगनेंसी में क्या नहीं करना चाहिए, इस बारे में जानकारी देंगे। हो सकता है कुछ चीजें आप ऐसे भी जानेंगे जो गर्भावस्था की पहली तिमाही में नहीं कर सकते, लेकिन दूसरी या तीसरी तिमाही में कर सकती हैं-

  1. ज्यादा न झुकेंगर्भावस्था के दौरान ज्यादा न झुकें। चाहे आपकी पहली, दूसरी या तीसरी तिमाही हो, ध्यान रहे कि आप ज्यादा न झुकें। ऐसा करने से गर्भपात, वक्त से पहले प्रसव या गर्भ में पल रहे शिशु को हानि हो सकती है। अगर आप झुक भी रहें हैं, तो झटके से न झुके, उठे और बैठें (25)
  1. ज्यादा देर तक खड़े न रहे – गर्भावस्था के दौरान ज्यादा देर तक खड़े न रहें, ऐसा करने से परेशानी हो सकती है। ज्यादा देर तक खड़े रहने से गर्भपात, गर्भावस्था में समस्या, वक्त से पहले प्रसव, गर्भ में शिशु की मृत्यु भी हो सकती है (25) (26)
  1. भारी चीजें न उठाएं – गर्भावस्था के दौरान भारी चीजें उठाने से बचें। गर्भावस्था के दौरान भारी चीजें उठाने से गर्भपात का खतरा हो सकता है (25)
  1. शराब का सेवन न करें – गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन न करें। शराब के सेवन से गर्भ में पल रहे शिशु पर बहुत ही बुरा प्रभाव पड़ सकता है। इससे गर्भपात हो सकता है, गर्भ में शिशु की मृत्यु हो सकती है, शिशु की शारीरिक बनावट पर असर हो सकता है और कई अन्य समस्या हो सकती हैं। इसे फीटल अल्कोहल स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर (Fetal Alcohol Spectrum Disorders) कहते हैं (27)
  1. धूम्रपान – गर्भावस्था में सिर्फ शराब ही नहीं, बल्कि धूम्रपान करना भी गर्भ में पल रहे शिशु के विकास के लिए हानिकारक साबित हो सकता है। सिगरेट में निकोटिन होता है, जो शिशु के मस्तिष्क और फेफड़ों के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। धूम्रपान करना शिशु के वजन और शिशु की शारीरिक बनावट के लिए खतरनाक हो सकता है। सिर्फ गर्भावस्था में ही नहीं, बल्कि गर्भावस्था के बाद भी धूम्रपान शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है और यह सडेन इन्फेंट डेथ सिंड्रोम (Sudden Infant Death Syndrome – SIDS) का कारण भी बन सकता है (28)
  1. मालिश – गर्भावस्था के दौरान मालिश कराना आरामदायक हो सकता है, लेकिन ध्यान रहे कि पहली तिमाही में मालिश न कराएं, क्योंकि पहली तिमाही में मालिश कराते वक्त अगर आपके पेट पर दबाव पड़ता है, तो यह नुकसानदायक हो सकता है। इसलिए, किसी भी तिमाही में मालिश कराने से पहले अपने डॉक्टर की सलाह लें और ऐसी मालिश का चयन करें जिसमें आपके पेट पर कोई भार न पड़े (29)
  1. सॉना या जकूजी न लें – गर्भावस्था के दौरान सोना या जकूजी बाथ न लें। जब आप सोना यानी स्टीम बाथ का उपयोग करते हैं, या फिर जकूजी यानी हॉट टब या गर्म पानी से नहाते हैं, तो आपका शरीर पसीने के जरिए हीट को बाहर नहीं निकाल पाता है, जिस कारण आपके शरीर के तापमान का प्रभाव आपके गर्भ में पल रहे शिशु पर पड़ सकता है। इसका असर खासतौर पर पहली तिमाही के वक्त हो सकता है (29)
  1. एक्स-रे – गर्भावस्था के दौरान एक्स-रे कराने से बचें। अगर आपको कोई समस्या हुई है, जिसमें आपको एक्स-रे कराने की जरूरत है, तो आप डॉक्टर से अपनी गर्भवस्था के बारे में बताएं, ताकि वो आपको कोई और विकल्प की सलाह दें। एक्स-रे के दौरान निकलने वाले रेडिएशन से गर्भ में पल रहे शिशु को खतरा हो सकता है। रेडिएशन का असर शिशु के शारीरिक और मानसिक विकास पर पड़ सकता है या शिशु को कोई जन्मदोष होने का खतरा भी हो सकता है। इसके अलावा, बच्चे को कम उम्र में कैंसर का खतरा भी हो सकता है, लेकिन कैंसर का जोखिम बहुत ही कम है (29)
  1. तनाव से बचें – गर्भावस्था के दौरान महिला के शरीर में कई बदलाव होते हैं, जिस कारण तनाव हो सकता है। ध्यान रहे कि अगर तनाव अधिक है, तो यह गर्भवती और होने वाले शिशु दोनों के लिए खतरे की घंटी बन सकता है। तनाव के कारण गर्भ में पल रहे शिशु के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रभाव पड़ सकता है (30)। इसलिए, जितना हो सके तनाव से बचने की कोशिश करें।
  1. क्या न खाएं – ज्यादा तीखा, तला-भुना और देर से भोजन न करें। एक बार में ज्यादा खाना न खाएं, बल्कि थोड़ा-थोड़ा खाएं। पेय पदार्थ या पानी का सेवन ज्यादा करें। खाने के बाद झुके नहीं या लेटे नहीं। अधिक चाय या कैफीन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन न करें। सॉफ्ट चीज़, कच्चा दूध, कच्ची या ज्यादा मरकरी वाली मछली, आधा पका मांस, अंडा, अनपाश्चराइज्ड खाद्य या पेय पदार्थ, कच्चा व जंक फूड्स या बाहर के खाने से बचें (16) (31) (32) (33)
  1. बिना डॉक्टरी सलाह के दवा न लें – गर्भावस्था के दौरान सिरदर्द, बुखार या अन्य कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या होने पर खुद से कोई दवा न लें, बल्कि डॉक्टर की सलाह पर ही दवा लें। अगर आपको कोई स्वास्थ्य संबंधी समस्या है, तो उसके बारे में डॉक्टर से बात करें और डॉक्टर के कहे अनुसार ही दवा लें।
  1. टाइट कपड़े या ऊंची हील वाले फुटवियर न पहनें – गर्भावस्था के दौरान आरामदायक कपड़े पहने न कि ज्यादा टाइट (34)। ज्यादा टाइट कपड़े पहनने से न सिर्फ आपको परेशानी होगी, बल्कि आपके गर्भ में पल रहे शिशु को भी समस्या हो सकता है। अगर बात करें फुटवियर की, तो फ्लैट सैंडल या चप्पल पहनें।
  1. पीठ या पेट के बल न सोएं – गर्भावस्था के दौरान पीठ या पेट के बल न लेटें। पीठ के बल लेटने से गर्भ में पल रहे शिशु को खतरा हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान कई तरह के जोखिम भी हो सकते हैं और यहां तक कि शिशु का विकास भी रुक सकता है (35)। सिर्फ पीठ ही नहीं, बल्कि पेट के बल सोना भी शिशु के लिए नुकसानदायक हो सकता है।
  1. शोर से दूर रहें – जैसा कि हमने आपको ऊपर बताया कि शिशु 24वें हफ्ते में आवाजों को सुनकर प्रतिक्रिया दे सकता है। ऐसे में जितना हो सके शोर-शराबे वाले जगहों से दूर रहें। ज्यादा शोर आपके लिए तनाव का कारण बन सकता है, जिसका असर आपके बच्चे पर भी हो सकता है। इतना ही नहीं ज्यादा शोर आपके गर्भ में पल रहे शिशु के कानों पर असर डाल सकता है (11)
  1. कुछ मामलों में व्यायाम न करें – अगर व्यायाम करते वक्त आपको असहज महसूस हो, चक्कर आए, थकावट महसूस हो, पेट में दर्द या रक्तस्त्राव हो, तो तुरंत व्यायाम रोकें और डॉक्टर से संपर्क करें (24)

आशा करते हैं ऊपर बताए गए गर्भावस्था में क्या करें और क्या न करने के टिप्स आपकी गर्भावस्था के अनुभव को आसान बनाएंगे। गर्भावस्था बहुत ही खूबसूरत अनुभव है, इसलिए इस पल का आनंद लें। खुद सुरक्षित रहें और गर्भ में पल रहे शिशु को भी स्वस्थ और सुरक्षित रखें। अगर गर्भावस्था के दौरान आपको अपने अंदर कुछ भी अलग महसूस हो, तो डॉक्टर से बात करने में न हिचकिचाएं। खुश रहें, स्वस्थ रहें और अपने गर्भावस्था का अनुभव हमारे साथ साझा करना न भूलें।

संदर्भ (References) :

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